मनरेगा की हत्या और बदले की राजनीति पर कांग्रेस का हमला, मोदी सरकार पर काम का अधिकार छीनने का आरोप
देहरादून | प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में आज राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा को समाप्त करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने तथाकथित सुधारों के नाम पर लोकसभा में बिल पारित कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को कमजोर कर दिया है। यह कदम महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास की सोच पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि मनरेगा से करोड़ों ग्रामीण परिवारों को जीवनयापन का सहारा मिला और कोविड काल में यह योजना आर्थिक सुरक्षा की रीढ़ साबित हुई थी।

प्रेस वार्ता में कहा गया कि वर्ष 2014 से लगातार मनरेगा का बजट घटाया गया, राज्यों के वैधानिक फंड रोके गए, जॉब कार्ड हटाए गए और आधार आधारित भुगतान के नाम पर लाखों मजदूरों को योजना से बाहर किया गया। परिणामस्वरूप, पिछले कई वर्षों में मजदूरों को औसतन 50–55 दिन ही काम मिल पा रहा है।
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कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नए ढांचे के जरिए मनरेगा को अधिकार आधारित योजना से बदलकर केंद्र नियंत्रित, सशर्त स्कीम बनाया जा रहा है, जिससे गरीबों का संवैधानिक अधिकार छीना जा रहा है। साथ ही राज्यों पर आर्थिक बोझ डालते हुए केंद्र नियंत्रण बनाए रखने को संघीय ढांचे पर हमला बताया गया।
नेताओं ने कहा कि रोजगार को समयबद्ध रूप से रोकने, फंड सीमित करने और केंद्रीकृत डिजिटल नियंत्रण से मजदूरों की आजीविका असुरक्षित हो जाएगी। ग्राम सभाओं और पंचायतों के अधिकार छीनकर केंद्रीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रेस वार्ता में नेशनल हेराल्ड मामले का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अदालत द्वारा केस खारिज होना मोदी–शाह की बदले की राजनीति पर करारा तमाचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी और अन्य जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए किया गया, लेकिन सत्य की जीत हुई है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह मनरेगा, लोकतंत्र, संविधान और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।
प्रेस वार्ता का संचालन गरिमा मेहरा दसौनी ने किया।
