सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों की मनमानी पर कड़ा अंकुश लगाया — अंशुमान जायसवाल को विज्ञान धारा में पढ़ाई जारी रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों की मनमानी पर कड़ा अंकुश लगाया — अंशुमान जायसवाल को विज्ञान धारा में पढ़ाई जारी रखने का आदेश
देहरादून के सेंट जोसेफ एकेडमी (St Joseph Academy) के छात्र अंशुमान जायसवाल के मामले में उच्चतम न्यायालय ने स्कूल प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ अहम फैसला सुनाया है।





📌 मामला क्या था?
अंशुमान को उसके कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर विज्ञान धारा (Science stream) में कक्षा 11वीं में प्रवेश दिया गया था।
बाद में स्कूल प्रबंधन ने यह कहते हुए उसे विज्ञान धारा से हटा कर कॉमर्स धारा में भेज दिया कि उसने विज्ञान में प्रवेश के लिए निर्धारित न्यूनतम अंकों को हासिल नहीं किया।
इसके बाद स्कूल ने उसे विज्ञान कक्षा में बैठने से भी मना कर दिया।
छात्र और उसके माता-पिता ने पहले उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्याय की मांग की, लेकिन वहाँ उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) में विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) दाखिल की।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
23 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने सुनाया फैसला:
✅ कोर्ट ने आदेश दिया कि अंशुमान को विज्ञान धारा में कक्षा 11वीं पढ़ाई पूरी करने दिया जाए।
✅ उसे कक्षा 11वीं की परीक्षा में भी बैठने की अनुमति दी जाए।
✅ जिलाधिकारी देहरादून, स्कूल प्रबंधन और छात्र के बीच विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लिया जाए कि उसे विज्ञान धारा में 12वीं बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति कैसे दी जाए।
➡️ इससे अंशुमान को विज्ञान धारा में पढ़ते हुए अपनी मेरिट (performance) दिखाने और विज्ञान में 12वीं बोर्ड परीक्षा देने का अवसर मिलेगा।
🙏 पिता ने जताया आभार
छात्र के पिता श्री राजकुमार जायसवाल ने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद और आभार प्रकट किया है कि अदालत ने उनके बेटे के भविष्य का मार्ग स्पष्ट किया।
