राष्ट्रपति अभिभाषण विकसित भारत का रोडमैप, विपक्ष का हंगामा दुर्भाग्यपूर्ण : महेंद्र भट्ट
राष्ट्रपति अभिभाषण विकसित भारत का रोडमैप, विपक्ष का हंगामा दुर्भाग्यपूर्ण : महेंद्र भट्ट
देहरादून | 28 जनवरी 2026
भारतीय जनता पार्टी ने संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण को विकासोन्मुख और कल्याणकारी शासन की दिशा तय करने वाला दस्तावेज बताया है। भाजपा उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि यह अभिभाषण “विकसित और आत्मनिर्भर भारत” के विजन का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करता है।

बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए भट्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार 2047 तक भारत को विश्व महाशक्ति बनाने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। इस दिशा में जनसहभागिता से निर्णायक प्रयासों की रूपरेखा अभिभाषण में सामने रखी गई है। उन्होंने कहा कि यह संबोधन समाज के प्रत्येक वर्ग के सर्वांगीण उत्थान और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भट्ट ने दावा किया कि बीते 11 वर्षों में सेवा, सुशासन, समृद्धि और गरीब कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। उनके अनुसार, एक दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा 25 करोड़ से बढ़कर 95 करोड़ लोगों तक पहुंचा है। सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में गरीबों को और अधिक सशक्त बनाने तथा भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने एआई के दुरुपयोग, डीपफेक और फर्जी सामग्री को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए इस विषय पर सामूहिक विमर्श की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
भट्ट ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में माओवादी उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाइयों का उल्लेख किया, जिससे इन चुनौतियों में कमी आई है। किसानों की समृद्धि को विकसित भारत की प्राथमिकता बताते हुए पीएम किसान सम्मान निधि योजना का जिक्र भी किया गया। गांवों के विकास और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण को भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया गया।
विपक्ष के हंगामे पर निशाना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अभिभाषण के दौरान विपक्ष के हंगामे को दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि जब बंकिम चंद्र चटर्जी और गुरु तेग बहादुर के बलिदान का उल्लेख हो रहा था, तब विपक्ष द्वारा शोर-शराबा किया गया, जो सदन की गरिमा के विपरीत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा सहयोग की अपील के बावजूद इस प्रकार का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है।
