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मायरा केयर फाउंडेशन और Shine Avi Learning USA की साझेदारी, ऑटिज़्म बच्चों के लिए होलिस्टिक लर्निंग सेंटर और विजुअल पाठ्यक्रम लॉन्च

देहरादून में विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस, समावेशी शिक्षा की नई पहल

मायरा केयर फाउंडेशन और Shine Avi Learning USA की साझेदारी, ऑटिज़्म बच्चों के लिए होलिस्टिक लर्निंग सेंटर और विजुअल पाठ्यक्रम लॉन्च

देहरादून, भारत केसरी।

विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के अवसर पर 1 अप्रैल 2026 को देहरादून स्थित प्रेस क्लब ऑफ उत्तराखंड में मायरा केयर फाउंडेशन द्वारा Shine Avi Learning USA के सहयोग से एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य ऑटिज़्म और अन्य विकासात्मक चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देना है।

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यह पहल उत्तराखंड सरकार की रिवर्स माइग्रेशन योजना के तहत प्रवासी प्रकोष्ठ के समर्थन से संचालित हो रही है, जिसका लक्ष्य राज्य में ही बेहतर और स्थायी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

मायरा केयर फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. निशांत नवानी के अनुसार, देहरादून में स्थापित यह देश का पहला होलिस्टिक लर्निंग सेंटर है, जहां ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम पर आने वाले बच्चों और अन्य न्यूरोडेवलपमेंटल चुनौतियों वाले व्यक्तियों को एक ही छत के नीचे समग्र सेवाएं दी जाएंगी। इसमें प्रारंभिक हस्तक्षेप, व्यक्तिगत शिक्षा, सामाजिक एवं जीवन कौशल विकास और स्वतंत्र कार्य प्रणाली जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

फाउंडेशन की ऑपरेशंस हेड अनीता थपलियाल ने अपने 20 वर्षों के अनुभव के आधार पर एक विशेष समग्र शिक्षण मॉडल तैयार किया है, जो बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। वहीं सह-संस्थापक डॉ. जया नवानी, जो एक अनुभवी मनोचिकित्सक हैं, इस पहल को मजबूत चिकित्सकीय दिशा प्रदान कर रही हैं।

इसी के साथ Shine Avi Publications Pvt. Ltd. द्वारा एक विजुअल आधारित पाठ्यक्रम भी लॉन्च किया जाएगा, जिसमें 2700 से अधिक पुस्तकें शामिल होंगी। यह पाठ्यक्रम उन बच्चों के लिए तैयार किया गया है, जो पारंपरिक तरीकों से सीखने में कठिनाई महसूस करते हैं।

यह पहल मुख्यधारा के स्कूलों में पुल-आउट रिसोर्स रूम्स के माध्यम से लागू की जाएगी, जिससे सामान्य और विशेष शिक्षा के बीच की दूरी कम होगी और बच्चों में आत्मविश्वास व स्वतंत्रता का विकास होगा।

इस संयुक्त प्रयास का उद्देश्य उत्तराखंड के परिवारों को सशक्त बनाना, महानगरों की ओर पलायन को कम करना और राज्य में एक समावेशी व स्थायी शिक्षा प्रणाली विकसित करना है, जिसे भविष्य में पूरे देश में विस्तार देने की योजना है।

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