“दमदार – रेयर बट पावरफुल”: देहरादून में गूंजी हौसले की आवाज, विशेष बच्चों के समर्थन में जुटा समाज
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“दमदार – रेयर बट पावरफुल” कार्यक्रम में गूंजी साहस और संवेदनाओं की आवाज**
*विश्व ऑटिज्म दिवस पर देहरादून में आयोजित कार्यक्रम ने दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों और परिवारों की चुनौतियों को किया उजागर*
देहरादून |
एएमडी वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा विश्व ऑटिज्म दिवस के अवसर पर “दमदार – रेयर बट पावरफुल” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों की कहानियों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। आयोजन का उद्देश्य समाज में जागरूकता बढ़ाना और एक समावेशी वातावरण को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हंस वैश्य, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. जसलीन कालरा शर्मा, बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. बिंदु छाबड़ा और नूपुर सोरेन फाउंडेशन की अध्यक्ष नूपुर सोरेन ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने विशेष जरूरतों वाले बच्चों के समुचित उपचार, भावनात्मक सहयोग और सामाजिक स्वीकार्यता की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. हंस वैश्य ने कहा कि समय पर पहचान और सही उपचार से बच्चों को बेहतर जीवन दिया जा सकता है। वहीं डॉ. जसलीन कालरा शर्मा ने फिजियोथेरेपी को बच्चों के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अहम बताया। डॉ. बिंदु छाबड़ा ने अभिभावकों के मानसिक सहयोग को जरूरी बताते हुए जागरूकता को सबसे बड़ा समाधान बताया।
कार्यक्रम के दौरान मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) और ऑटिज्म से जुड़े विषयों पर परिचर्चा भी आयोजित की गई। इसमें प्रभावित बच्चों के माता-पिता ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे कार्यक्रम का माहौल भावनात्मक हो गया।
कार्यक्रम का संचालन संस्था की अध्यक्ष गीतिका आनंद ने किया। उन्होंने कहा कि यह मंच केवल चर्चा के लिए नहीं, बल्कि समाधान और समर्थन की दिशा में ठोस पहल के लिए बनाया गया है।
इस अवसर पर समाजसेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे कई लोगों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के प्रति समाज में संवेदनशीलता, सहयोग और स्वीकार्यता ही उनके बेहतर भविष्य की कुंजी है।
