दून लिट फेस्ट 2026 इम्तियाज अली के संवाद और लोक-संगीत की जादुई शाम ने रचा यादगार संगम
दून पुस्तक महोत्सव 2026 में साहित्य, सिनेमा और लोक-संस्कृति का संगम
इम्तियाज अली के संवाद, बच्चों की रचनात्मक गतिविधियां और लोक-संगीत की सुरमयी शाम ने बांधा समां
देहरादून, भारत केसरी
दून पुस्तक महोत्सव 2026 के तहत आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज का दिन विशेष रूप से यादगार रहा, जहाँ साहित्य, सिनेमा और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहे प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली, जिन्होंने अपने विशेष सत्र में दर्शकों के साथ अपनी रचनात्मक यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने बचपन के दिलचस्प किस्सों का जिक्र करते हुए बताया कि वे छिप-छिपकर फिल्में देखा करते थे। अपनी चर्चित फिल्म रॉकस्टार और कश्मीर में शूटिंग के अनुभव को उन्होंने “बेहद खास और यादगार” बताया।







इम्तियाज अली ने बदलते सिनेमा ट्रेंड्स पर भी बात करते हुए कहा कि दर्शक एक बार फिर सिनेमाघरों की ओर लौट रहे हैं और अब लंबी अवधि की फिल्मों को भी स्वीकार कर रहे हैं। इस दौरान कर्नल आर.एस. सिद्धू और ब्रिगेडियर सुयश शर्मा ने भी संवाद सत्र में भाग लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
चिल्ड्रन्स कॉर्नर में रचनात्मकता का उत्साह
महोत्सव के चिल्ड्रन्स कॉर्नर में चौथे दिन करीब 1000 बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। “एक्ट इट आउट” सत्र में आस्था और तस्नीम ने मधुमक्खियों की कहानी को अभिनय के जरिए जीवंत किया।
इसके बाद क्लाउनिंग वर्कशॉप, कम्युनिकेशन स्किल्स सत्र और “पपेट्स इन कम्युनिकेशन” जैसी गतिविधियों ने बच्चों को सीखने के साथ मनोरंजन का अवसर दिया। “ऐपन आर्ट”, “आर्ट एंड क्राफ्ट” और “कलर मी” जैसी रचनात्मक गतिविधियों में बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
अनुवाद पर गहन मंथन
साहित्यिक सत्र में ‘अनुवाद के रचनात्मक आयाम’ विषय पर कुमाऊनी और गढ़वाली भाषाओं के विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। सत्र में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की गई।
विशेषज्ञों ने तकनीकी और वैज्ञानिक विषयों के अनुवाद में शब्द चयन की चुनौतियों और एआई आधारित अनुवाद की सीमाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि अनुवाद में तकनीकी शुद्धता और आंचलिक भावों के संतुलन की आवश्यकता है।
लोक-संगीत की सुरमयी शाम
सांस्कृतिक संध्या में ‘रहनुमा लाइव’ बैंड ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही राजस्थान से आए मांगणियार कलाकारों ने खड़ताल और कमायचा की धुनों पर पारंपरिक लोक-संगीत की शानदार प्रस्तुति दी, जिसने माहौल को पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में रंग दिया।
8 अप्रैल को भी खास रहेगा कार्यक्रम
महोत्सव में 8 अप्रैल को भी कई आकर्षक सत्र आयोजित किए जाएंगे। भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का विशेष सत्र मुख्य आकर्षण रहेगा।
इसके अलावा ‘लीडरशिप इन यूनिफॉर्म’ विषय पर लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ और वरिष्ठ पत्रकार नीरज राजपूत के साथ संवाद होगा। दिन का समापन ‘कलर्स ऑफ इंडिया’ बैंड की सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ किया जाएगा।
दून पुस्तक महोत्सव 2026 न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए एक मंच साबित हो रहा है, बल्कि यह सिनेमा, संस्कृति और रचनात्मकता के संगम के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है।
