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हरेला पर्व पर पहली बार बनेगा एक्शन प्लान, उत्तराखंड में 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य

देहरादून:

उत्तराखंड में इस वर्ष हरेला पर्व को नई सोच और सुनियोजित रणनीति के साथ मनाया जाएगा। पहली बार वन पंचायतों ने विभिन्न विभागों के सहयोग से एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसके तहत पौधारोपण अभियान को जनभागीदारी, निगरानी और संरक्षण से जोड़ते हुए अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। राज्यभर में करीब 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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अब तक हरेला पर्व के दौरान विभिन्न विभाग अपने-अपने स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाते थे, लेकिन इस बार वन पंचायतों, जिला प्रशासन और अन्य विभागों के समन्वय से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इसमें पौधारोपण के लक्ष्य, समयबद्ध क्रियान्वयन, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और लगाए गए पौधों के संरक्षण की व्यवस्था को विशेष रूप से शामिल किया गया है।

इस अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि राज्य और जिला स्तर पर गठित समितियों में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। सरकार का मानना है कि महिलाओं की सक्रिय सहभागिता से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जनजागरूकता को भी नई मजबूती मिलेगी।

हरेला अभियान को केंद्र सरकार के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से भी जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से लोगों को अपनी मां के सम्मान में पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। वन पंचायतों के जरिए इस संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी की गई है।

कार्ययोजना के तहत पौधों की उपलब्धता, रोपण स्थलों का चयन, स्थानीय जलवायु के अनुरूप पौधों की प्रजातियों का चयन और ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को सौंपी गई है, जबकि ग्राम पंचायतों और स्थानीय समितियों को भी इसमें सक्रिय भूमिका दी गई है।

प्रदेश में 16 जुलाई से हरेला पर्व की शुरुआत होगी और यह अभियान एक माह तक चलेगा। इस दौरान पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण, जनजागरूकता और सामुदायिक सहभागिता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्कूलों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला समूहों और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

इस वर्ष हरेला पर्व का राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम अल्मोड़ा में वन पंचायत के स्तर पर आयोजित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि पहली बार तैयार किए गए इस एक्शन प्लान से न केवल पौधारोपण का लक्ष्य हासिल होगा, बल्कि पौधों के संरक्षण और हरित उत्तराखंड के संकल्प को भी नई दिशा मिलेगी।