कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद गढ़ी कैंट शाखा करेगी आयोजन, बेटी की तरह होगी मां नंदा-सुनंदा की विदाई
देहरादून।
भारत केसरी
कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद, गढ़ी कैंट शाखा की ओर से 15 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक सीता राम मंदिर, नींबूवाला, कोलागढ़ में मां नंदा-सुनंदा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव को लेकर आयोजकों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
कुमाऊं की लोक संस्कृति में मां नंदा-सुनंदा को देवी के साथ-साथ बेटी के रूप में मानने की परंपरा रही है। मान्यता है कि हिमालय की बेटियां नंदा और सुनंदा भगवान शिव से विवाह के बाद कैलाश चली गईं। सुनंदा को नंदा की सहचरी और छोटी बहन के रूप में माना जाता है।

कुमाऊं में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार नंदा-सुनंदा को स्त्री शक्ति, त्याग और मेहनत का प्रतीक माना जाता है। महोत्सव के दौरान कदली वृक्ष से मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। इन प्रतिमाओं को कूर्मासन यानी कछुए के आसन पर विराजमान किया जाता है, जिसका संबंध कुमाऊं के प्राचीन नाम कूर्मांचल से माना जाता है।
महोत्सव के दौरान विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के बाद तीन दिनों तक झोड़ा, चाचरी, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसके बाद मां नंदा-सुनंदा की विदाई की जाएगी। आयोजकों के अनुसार यह केवल विसर्जन नहीं, बल्कि मायके से बेटी की ससुराल विदाई का भावनात्मक पर्व है।
इस वर्ष महोत्सव में मां नंदा-सुनंदा के माता-पिता की भूमिका श्री राजेंद्र बिष्ट एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती नंदी बिष्ट निभाएंगे।
आयोजन में बबीता साह लोहनी, कूर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद के अध्यक्ष कमल रजवार, सचिव गोविंद पांडे, संरक्षक राजेंद्र सिंह बिष्ट, गढ़ी कैंट अध्यक्ष राजेश पंत, केडी जोशी, प्रेमा तिवारी, हरीश चंद पांडे, कमला उप्रेती, कल्पना वर्मा, गणेश कांडपाल, रमा कांडपाल, कमल पटेल, हंसा राणा, पवन डबराल, लक्ष्मण सिंह बिष्ट, मनमोहन बटकोरा सहित मीडिया प्रभारी वंदना बिष्ट एवं समस्त पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहेंगे।
