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युवा रोजगार और महिला सशक्तिकरण: रंग ला रही धामी सरकार की पहल

देहरादून। उत्तराखंड की पहाड़ियों में बीते कुछ वर्षों के दौरान विकास और रोजगार को लेकर तस्वीर बदलने की कोशिशें दिखाई दे रही हैं। लंबे समय से पलायन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के सीमित अवसर राज्य के सामने बड़ी चुनौती रहे हैं। ऐसे में युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सरकार की विभिन्न योजनाओं को महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार का जोर इस बात पर है कि उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के लिए राज्य से बाहर जाने के बजाय अपने ही प्रदेश में अवसर मिलें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं छात्र राजनीति से निकले हैं और सरकार में युवाओं की भागीदारी तथा उनकी आकांक्षाओं को नीतियों से जोड़ने पर लगातार जोर देते रहे हैं।

युवाओं की आवाज को नीति से जोड़ने की पहल

युवा आकांक्षाओं को नीति निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य में समर्पित युवा आयोग की स्थापना की गई। इसके साथ ही ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ (युवा विद्यार्थी मंथन) अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थियों से प्रदेश के विकास को लेकर सुझाव लिए गए।

लेख के अनुसार, इस अभियान में 2.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी रही। छात्रसंघ चुनावों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण जैसी पहल को भी युवा नेतृत्व और महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद

सरकार की ओर से युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के तहत हर वर्ष करीब 11 हजार कॉलेज और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को ऑनलाइन कोचिंग और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के लिए ₹10 करोड़ के बजट का उल्लेख किया गया है।

इस पहल का उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े।

शिक्षा में तकनीक और कौशल पर जोर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में तकनीक और व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, राज्य के 500 से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम संचालित हो रहे हैं, जबकि 241 पीएम मॉडल स्कूल आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किए जा रहे हैं।

इसके अलावा 42 हजार से अधिक विद्यार्थियों को आठ उच्च मांग वाले व्यवसायों में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाने का दावा किया गया है। मेधावी छात्राओं को स्मार्टफोन और महिला तकनीकी अभ्यर्थियों को वार्षिक प्रगति छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का उद्देश्य भी शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना है।

कौशल विकास से विदेशों तक पहुंच रहे युवा

उत्तराखंड कौशल विकास मिशन और मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन योजना के माध्यम से युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। प्रशिक्षण ऋण पर 30 प्रतिशत प्रत्यक्ष सब्सिडी और 70 प्रतिशत ब्याज छूट जैसी सहायता का उल्लेख करते हुए सरकार का कहना है कि इससे युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार के लिए तैयार करने में मदद मिल रही है।

सरकार के अनुसार, प्रशिक्षण प्राप्त कई युवाओं को जापान, जर्मनी और सऊदी अरब में तकनीकी एवं नर्सिंग क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिले हैं।

वहीं, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना के तहत अल्पकालिक प्रशिक्षण में लक्ष्य पूर्ति का दावा किया गया है, जिसके जरिए ग्रामीण युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

स्वरोजगार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर

उत्तराखंड में स्टार्टअप और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। लेख के अनुसार, राज्य में पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या वर्ष 2017 में लगभग शून्य से बढ़कर 2024-25 तक 1,750 से अधिक हो गई। इसी आधार पर उत्तराखंड को DPIIT की राष्ट्रीय रैंकिंग में ‘लीडर’ श्रेणी मिलने का उल्लेख किया गया है।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत सरकार के अनुसार ₹1,389 करोड़ से अधिक के सब्सिडी वाले ऋण 35 हजार से अधिक स्थानीय उद्यमियों को उपलब्ध कराए गए हैं। इससे करीब 65 हजार स्थानीय रोजगार सृजित होने का दावा किया गया है।

योजना के तहत पात्र उद्यमियों को 15 से 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराने की व्यवस्था का भी उल्लेख है।

पर्यटन और हरित अर्थव्यवस्था से रोजगार

मुख्यमंत्री सोलर स्वरोजगार योजना और दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना के जरिए स्थानीय युवाओं को पर्यटन और स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इन योजनाओं में पात्र परियोजनाओं के लिए 50 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है।

वहीं, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रोत्साहन योजना के तहत IIT और IIM के माध्यम से उद्यमिता प्रशिक्षण तथा ऋण पर 30 प्रतिशत सब्सिडी जैसी सहायता का उल्लेख किया गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को भी इन योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

खेलों में बेटियों को आगे बढ़ाने पर जोर

युवा विकास के साथ खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के लिए मुख्यमंत्री खिलाड़ी उन्नयन योजना संचालित की जा रही है। सरकार के अनुसार, प्रत्येक जिले में 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के चयनित 3,900 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को ₹1,500 प्रतिमाह की खेल छात्रवृत्ति दी जा रही है।

चंपावत में आदिवासी बालिकाओं के लिए राज्य के पहले आवासीय खेल महाविद्यालय का निर्माण भी प्रस्तावित/प्रगतिरत है। इसके लिए ₹256 करोड़ के निवेश का उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य बालिकाओं को खेल प्रशिक्षण के साथ बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

रोजगार के आंकड़ों पर सरकार का जोर

सरकार की ओर से राज्य में बेरोजगारी दर में कमी के आंकड़े भी प्रस्तुत किए जाते रहे हैं। इस आलेख में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में समग्र बेरोजगारी दर करीब 4.4 प्रतिशत और युवा बेरोजगारी दर 9.8 प्रतिशत बताई गई है, जबकि पूर्व में युवा बेरोजगारी दर 14.2 प्रतिशत होने का उल्लेख किया गया है।

इन आंकड़ों का वास्तविक आकलन करते समय संबंधित अवधि, सर्वेक्षण की पद्धति और स्रोत को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।

युवाओं और महिलाओं को अवसर देने की दिशा में प्रयास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन के अवसर पर लिखे गए इस आलेख में सरकार की युवा रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार, खेल और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को केंद्र में रखा गया है। इन पहलों का व्यापक उद्देश्य युवाओं को शिक्षा और प्रशिक्षण के साथ रोजगार तथा उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना और महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक भागीदारी को बढ़ाना है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और युवाओं को अपने गांव तथा शहरों में ही आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना पलायन की चुनौती से निपटने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जाता है। आने वाले समय में इन योजनाओं का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है, यह उनके वास्तविक क्रियान्वयन, रोजगार की स्थिरता और लाभार्थियों तक पहुंच से तय होगा।