आयुध निर्माणी के कर्मचारियों ने भोजपुरी संस्कृति समाज के तत्वाधान में मनाया छठ पूजा का त्यौहार।
उत्तराखंड के देहरादून में लोकआस्था के महापर्व का जन सैलाब देखने को मिला..

अपने सांस्कृतिक विरासत को संभाले हुए, आयुध निर्माणी स्टेट में भोजपुरी समाज हर साल लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व निरंतर मना रहा है।
इस आयोजन में आयुध निर्माणी के सभी कर्मचारी, अधिकारी, एवं अन्य सैकड़ो की संख्या में शामिल होते हैं और साथ में आदित्य देव की पूजा अर्चना करते हैं।



ऐसे तो सांस्कृतिक विरासत की कोई सीमा नहीं होती लेकिन भोजपुरी संस्कृत समाज की स्थापना 1995 आयुध निर्माणी स्टेट में आयुध निर्माणी के कर्मचारियों के द्वारा की गई थी।
भोजपुरी समाज के संस्थापक प्रमुख जवाहर राय , मदन ठाकुर, एवं रामनिवास जी के अनेक गणमान्य समाज के त्याग, तपस्या और अथक प्रयास का फल है।
इस समाज की संस्था का मुख्य उद्देश्य आयुध निर्माणी में कार्यरत कर्मचारियों के भोजपुरी समाज मुख्य रूप से पूर्वांचल, यूपी, बिहार के लोगों को साथ लेकर एक मंच पर लाना रहा है, और छठ जैसे त्यौहार में जहां पर हर लोगों के दिल और मन मस्तिष्क में यूपी – बिहार ही बसता हो, वैसे में आध्यात्मिक और ही अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
भोजपुरी समाज के आध्यात्मिक उपासना के पर्व में आयुध निर्माणी के कई कर्मचारी संगठन ,इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस,ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाई फेडरेशन, बहुजन कर्मचारी संगठन एवं आयुध निर्माणी के अधिकारी इसमें बढ़ चढ़कर भाग लेते हैं और इस आध्यात्मिक उपासना के पर्व में अर्घ्य अर्पित करते हैं

ऐसी मान्यता है कि लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व, करने से सूर्य देवता की कृपा की प्राप्ति होती है।
साथ ही छठी माता प्रसन्न होकर जीवन में सभी विघ्नताओं को हर लेती है
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व है। यह त्योहार मुख्य रूप से पारिवारिक सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान की कामना के लिए मनाया जाता है।
इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण और मान्यताएँ हैं:
सूर्य देव की उपासना: छठ पूजा प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक तरीका है, क्योंकि सूर्य ही पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं। इस पूजा में ढलते और उगते हुए सूर्य दोनों को अर्घ्य दिया जाता है।
छठी मैया की पूजा: छठी मैया को सूर्य देव की बहन माना जाता है। उन्हें षष्ठी देवी या देवसेना के नाम से भी जाना जाता है। छठ के दौरान व्रत रखने वाले लोग सूर्य के साथ-साथ छठी मैया की भी पूजा करते हैं।
पौराणिक कथाएं: इस पूजा से कई प्राचीन कथाएँ जुड़ी हुई हैं:
कर्ण और सूर्य देव: महाभारत के अनुसार, सूर्य के पुत्र कर्ण ने सबसे पहले छठ पूजा की शुरुआत की थी।
द्रौपदी और पांडव: एक अन्य कथा के अनुसार, जब पांडव अपना राजपाट हार गए थे, तब द्रौपदी ने सूर्य देव की पूजा करके खोया हुआ वैभव वापस पाने की प्रार्थना की थी।
राम और सीता: रामायण के अनुसार, भगवान राम और सीता ने भी लंका से अयोध्या लौटने के बाद सूर्य देव की पूजा की थी।
अदिति और सूर्य: एक मान्यता के अनुसार, ऋषि कश्यप और अदिति ने पुत्र प्राप्ति के लिए सूर्य देव की पूजा की थी। कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को अदिति के पुत्र के रूप में सूर्य देव का जन्म हुआ था।
इस पर्व के दौरान भक्त कठोर तपस्या करते हैं, जिसमें 36 घंटे का निर्जल उपवास भी शामिल है।

वर्तमान में भोजपुरी समाज के मुख्य कार्यकर्ता के रूप में या मुख्य सेवक के रूप में सचिन , मनोहर आनंद एवं अशोक कुमार अध्यक्ष तौर पर संगठन को सृजनात्मक रूप से आगे लेकर जा रहे हैं और हर साल की भांति इस साल भी छठ पूजा का त्योहार पूरे आयुध निर्माणी स्टेट में हर्षो उल्लास से मनाते रहे हैं, सदस्य के रूप में राजन कुमार , सरयू प्रसाद , श्याम वृक्ष , अमरजीत , विजय प्रताप सिंह , राजीव यादव ,अभिषेक कुमार, शंभू कुमार इत्यादि लोग सम्मिलित होकर आदित्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं !

