बैंक ऑफ बड़ौदा की मनमानी पर चला जिला प्रशासन का डंडा
बैंक ऑफ बड़ौदा की मनमानी पर चला जिला प्रशासन का डंडा
बुजुर्ग विधवा कमलेश और असहाय पुत्री प्रीति को मिला न्याय
बीमित ऋण के बावजूद वसूली का दबाव; 24 घंटे के भीतर जारी हुआ ₹3.30 लाख का चेक
देहरादून, 12 दिसंबर 2025 ।
जनपद देहरादून में बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा एक बुजुर्ग विधवा कमलेश तथा उनकी नामिनी पुत्री प्रीति सिंह को बीमित ऋण होने के बावजूद अवैध रूप से धनराशि जमा कराने के दबाव का मामला सामने आया। पीड़िता की शिकायत पर जिलाधिकारी सविन बंसल के त्वरित हस्तक्षेप के बाद बैंक पर कार्रवाई की गई और मात्र 24 घंटे के भीतर ₹3.30 लाख का चेक पीड़िता को उपलब्ध करा दिया गया।

मामला क्या था?
प्रीति सिंह ने जिलाधिकारी कार्यालय में अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनके पिता स्व. राजेंद्र पाल ने वर्ष 2023 में ₹13 लाख का ऋण बैंक ऑफ बड़ौदा से लिया था। बैंक अधिकारियों के कहने पर ऋण का बीमा भी कराया गया था। 2023 से अप्रैल 2025 तक उनके पिता ₹22,295 प्रतिमाह की किस्तें नियमित रूप से जमा करते रहे।
अप्रैल 2025 में पिता के निधन की सूचना परिवार द्वारा तुरंत बैंक और बीमा कंपनी को दे दी गई। जून 2025 में बीमा कंपनी ने समस्त ऋण क्लेम राशि बैंक में जमा भी कर दी।
इसके बावजूद बैंक द्वारा न तो नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा था, बल्कि प्रीति पर ₹3,30,980 अतिरिक्त राशि जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा था और यहां तक कि सम्पत्ति जब्त करने की धमकी भी दी जा रही थी।
जिलाधिकारी का तत्काल एक्शन
पीड़िता की शिकायत सुनते ही जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी को तत्काल जांच के आदेश दिए।
जांच में यह स्पष्ट पाया गया कि—
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बीमा क्लेम मिलने के बाद भी बैंक अवैध रूप से अतिरिक्त धनराशि की मांग कर रहा था।
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बैंक की इस हरकत को नियमविरुद्ध मानते हुए प्रशासन ने ₹3,30,980 की आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) काटी।
