38वें नेशनल गेम्स के पदक विजेता खिलाड़ियों को कब मिलेगी नौकरी? 10 महीने बीते, ठंडे बस्ते में मामला — डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत
देहरादून।
उत्तराखंड में आयोजित 38वें नेशनल गेम्स (2025) के पदक विजेता खिलाड़ियों को अब तक सरकारी नौकरी नहीं मिलने पर इंटरनेशनल फुटबॉल कोच डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत का दर्द एक बार फिर सामने आया है। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि आखिर 10 महीने बीत जाने के बाद भी खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र क्यों नहीं दिए गए।
डॉ. रावत ने कहा कि फरवरी 2025 में उत्तराखंड में पहली बार नेशनल गेम्स का आयोजन किया गया, जो एक सराहनीय कदम था। इसके लिए उन्होंने भाजपा सरकार को बधाई भी दी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में 1200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से खेल अधोसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) विकसित की गई, जिसकी देशभर में सराहना हुई।
डॉ. रावत ने कहा कि उन्होंने स्वयं 23 वर्षों के संघर्ष के बाद उत्तराखंड में खेल नीति और स्पोर्ट्स कोटा लागू कराने के लिए लगातार धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल तक की। वे पिछले 27 वर्षों से खिलाड़ी, कोच और रेफरी के रूप में निःस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार ने खिलाड़ियों के हित में उनकी बात मानी, जिसका परिणाम यह रहा कि उत्तराखंड ने 38वें नेशनल गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 103 पदक (24 स्वर्ण, 35 रजत, 44 कांस्य) जीतकर पदक तालिका में 7वां स्थान हासिल किया। यह पहली बार था जब उत्तराखंड ने 100 से अधिक पदक जीतने का कीर्तिमान बनाया।
इसके साथ ही राज्य फुटबॉल टीम ने भी पहली बार रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया, जबकि पूर्व में उत्तराखंड वर्षों तक क्वालीफाई तक नहीं कर पाता था।
डॉ. रावत ने कहा कि सरकार ने दो स्पष्ट वादे किए थे—
पदक विजेता खिलाड़ियों को शीघ्र नगद पुरस्कार
सरकारी नौकरी में नियुक्ति
उन्होंने बताया कि करीब 20 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि खिलाड़ियों को भारी दबाव के बाद दी गई, लेकिन नौकरी का वादा अब तक अधूरा है। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि 10 महीने बीतने के बावजूद कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।
डॉ. रावत ने दावा किया कि कई खिलाड़ी, जिन्होंने रिवर्स पलायन कर उत्तराखंड से खेला, भविष्य की उम्मीद में जुड़े थे, लेकिन नौकरी न मिलने से वे दोबारा अन्य राज्यों की टीमों में खेलने को मजबूर हो गए। कुछ खिलाड़ियों ने उनसे संपर्क कर अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध किया, क्योंकि उनका भविष्य दांव पर है।


उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 103 पदकों की उपलब्धि का देशभर में प्रचार-प्रसार कर रही है, करोड़ों रुपये विज्ञापनों पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन खिलाड़ियों को समय पर नौकरी देने में सरकार असफल दिख रही है। वहीं खिलाड़ियों की उम्र लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे उनका भविष्य संकट में पड़ रहा है।
डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत ने सरकार से नम्र आग्रह किया है कि मार्च 2026 तक सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएं, क्योंकि इसके बाद आचार संहिता लागू होने और 2027 के चुनाव के चलते नियुक्तियां और लंबित हो सकती हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार चुनाव का इंतजार कर रही है या खिलाड़ियों को गुमराह किया जा रहा है?
उन्होंने कहा कि आने वाला समय ही बताएगा कि उत्तराखंड का खिलाड़ी ठगा गया या उसे उसका हक मिला।
