एंजेल चकमा की हत्या के बाद त्वरित कार्रवाई की मांग, मुख्यमंत्री से की अपील
देहरादून।
त्रिपुरा के युवा छात्र एंजेल चकमा की देहरादून में हुई निर्मम हत्या पर एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने गहरा दुख और पीड़ा व्यक्त की है। इस संबंध में उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक तात्कालिक पत्र लिखकर राज्य सरकार से संवेदनशील, स्पष्ट और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

CM Shri Pushkar Singh Dhami Letter for Anjel Chakma
अनूप नौटियाल ने पत्र में कहा है कि एंजेल चकमा की हत्या ने न केवल देहरादून बल्कि पूरे उत्तराखंड की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर दिया है। यह घटना राज्य में पढ़ने आने वाले अन्य राज्यों और विदेशों के छात्रों के बीच सुरक्षा, गरिमा, समावेशन और नस्लीय पूर्वाग्रह जैसे गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि देहरादून लंबे समय से देशभर के छात्रों के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद शैक्षणिक केंद्र माना जाता रहा है, लेकिन यह घटना उस छवि पर गहरा आघात है।
पत्र में अनूप नौटियाल ने एंजेल चकमा के परिवार तथा पूरे पूर्वोत्तर भारत के लोगों के प्रति पूर्ण एकजुटता और संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर पुलिस जांच प्रक्रिया जारी है, वहीं देशभर में, विशेषकर पूर्वोत्तर राज्यों में, इस घटना को नस्लीय हिंसा से जुड़ा अपराध माना जा रहा है। ऐसी धारणा केवल आधिकारिक बयानों से समाप्त नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए राज्य के शीर्ष नेतृत्व की ओर से ठोस और भरोसेमंद कदम उठाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं तीन प्रमुख मांगें
अनूप नौटियाल ने अपने पत्र में उत्तराखंड सरकार के समक्ष तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं—
राज्य सरकार के नेतृत्व में एक आधिकारिक प्रार्थना एवं शोक सभा का आयोजन किया जाए, ताकि एंजेल चकमा के परिवार और पूर्वोत्तर के लोगों के प्रति संवेदना, सम्मान और एकजुटता व्यक्त की जा सके।
मुख्यमंत्री द्वारा नामित प्रतिनिधियों का एक दल त्रिपुरा भेजा जाए, जो उत्तराखंड सरकार और प्रदेशवासियों की ओर से शोक संतप्त परिवार को व्यक्तिगत रूप से संवेदना प्रकट करे।
उत्तराखंड के सभी निजी विश्वविद्यालयों के संस्थापकों और कुलपतियों की एक आपात बैठक बुलाई जाए, जिसमें सरकार, पुलिस, प्रशासन, विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षक और छात्र समुदाय की सहभागिता से ऐसे ठोस एवं लागू करने योग्य कदम तय किए जाएं, जिससे राज्य में पढ़ने वाले सभी बाहरी छात्रों के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र सुनिश्चित हो सके।
पत्र में कहा गया है कि छात्रों के लिए सुरक्षित और स्वागतशील शहर के रूप में देहरादून की वर्षों पुरानी पहचान आज गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। आने वाले दिनों में उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि उत्तराखंड को एक संवेदनशील और उत्तरदायी राज्य के रूप में देखा जाएगा या छात्रों और उनके परिवारों की आशंकाओं के प्रति उदासीन राज्य के रूप में।
अंत में अनूप नौटियाल ने आशा व्यक्त की है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड सरकार इस त्रासदी को मानवीय, संवेदनशील और समावेशी दृष्टिकोण से देखेंगी। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में संवाद, पहुंच और सहानुभूति न केवल घावों को भरने में मदद कर सकती है, बल्कि उत्तराखंड की उस प्रतिबद्धता को भी दोहरा सकती है कि राज्य में पढ़ने आने वाला हर छात्र सुरक्षित है।
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