इंदौर पेयजल त्रासदी के बाद उत्तराखंड में जल सुरक्षा को लेकर अलर्ट
जल संस्थान व पेयजल निगम से त्वरित और पारदर्शी जांच की मांग
देहरादून।
देश के सबसे स्वच्छ एवं पहले वॉटर प्लस शहर इंदौर में दूषित पेयजल के सेवन से हुई व्यापक जनहानि को गंभीर चेतावनी मानते हुए सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज़ फाउंडेशन (SDC Foundation) के संस्थापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के मुख्य महाप्रबंधक व निदेशक को एक विस्तृत पत्र भेजकर राज्य में पेयजल सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की है।

पत्र में इंदौर की घटना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मृत्यु और सैकड़ों लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की सूचना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने चेताया कि पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में थोड़ी सी भी लापरवाही जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर और घातक परिणाम ला सकती है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और संवेदनशील राज्य में, जहां बड़ी आबादी नल के पानी पर निर्भर है, ऐसी किसी भी संभावित त्रासदी को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अनूप नौटियाल ने कहा कि वर्षा ऋतु, भूस्खलन, पाइपलाइन क्षति, सीवेज मिश्रण और जल स्रोतों के प्रदूषण जैसी परिस्थितियों में पेयजल की नियमित, वैज्ञानिक और मानक आधारित गुणवत्ता जांच और भी अधिक आवश्यक हो जाती है। समय रहते निगरानी और जांच न होने की स्थिति में आम नागरिकों का स्वास्थ्य गंभीर खतरे में पड़ सकता है।
पत्र के माध्यम से उन्होंने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
राज्य के सभी शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नल के माध्यम से आपूर्ति किए जा रहे पेयजल की तत्काल गुणवत्ता जांच कराई जाए, जिसमें भौतिक, रासायनिक एवं जैविक परीक्षण शामिल हों और यह प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।
जल स्रोतों, मुख्य व उप-पाइपलाइनों तथा वितरण नेटवर्क की निरंतर तकनीकी निगरानी सुनिश्चित करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए।
पेयजल सुरक्षा को लेकर राज्य-स्तरीय व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिसमें जांच रिपोर्ट, आवश्यक सावधानियाँ और टोल-फ्री शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाई जाए।
अनूप नौटियाल ने आशा व्यक्त की कि उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम इस गंभीर विषय पर शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि समय रहते उठाए गए ये कदम न केवल संभावित जनहानि को रोकने में सहायक होंगे, बल्कि जल आपूर्ति व्यवस्था और संबंधित संस्थानों के प्रति जनता के विश्वास को भी मजबूत करेंगे।
