अंकिता भंडारी हत्याकांड: सीबीआई जांच में पीड़ित परिवार को बाहर करने का विरोध
अंकिता भंडारी हत्याकांड: गरिमा मेहरा ने CBI जांच में पीड़ित परिवार को हाशिये पर रखने की सरकार पर उठाया आरोप


देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस की नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा पद्मश्री अनिल जोशी की एफआईआर के आधार पर सीबीआई जांच का आदेश देना न्याय प्रक्रिया को भटकाने और असली मुद्दे से ध्यान हटाने का प्रयास प्रतीत होता है।
गरिमा ने बताया कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस जघन्य हत्याकांड में पीड़ित परिवार को ही प्रक्रिया से बाहर रखा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अंकिता भंडारी के माता-पिता ने मुख्यमंत्री को लिखित अर्जी दी है, तो उनकी तहरीर के आधार पर सीबीआई जांच क्यों नहीं कराई गई।
उन्होंने कहा कि न्याय प्रक्रिया में सबसे पहला अधिकार पीड़ित परिवार का होता है, लेकिन इस मामले में सरकार ने जानबूझकर उन्हें हाशिये पर डाल दिया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गरिमा मेहरा की मांगें:
सीबीआई जांच पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर दर्ज की जाए।
जांच में अंकिता के माता-पिता को पक्षकार बनाया जाए।
जांच सिटिंग जज की देखरेख में हो।
दोषियों को बचाने की किसी भी साजिश की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
गरिमा ने चेतावनी दी कि उत्तराखंड की जनता अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में चुप नहीं बैठेगी और सरकार को पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि उनके अधिकारों को कुचलना।
