वनाग्नि रोकने को आपातकालीन आपदा प्रबंधन की अग्रिम तैयारी करे सरकार : धस्माना
वनाग्नि रोकने को आपातकालीन आपदा प्रबंधन की अग्रिम तैयारी करे सरकार : धस्माना
आग बुझाने के लिए केंद्र से भारतीय वायुसेना की मदद मांगे राज्य सरकार
देहरादून।
उत्तराखंड के गढ़वाल संभाग में जनवरी माह के दौरान जंगलों में आग लगने की घटनाएं आने वाले गर्मी के मौसम के लिए गंभीर चेतावनी हैं। यह बात उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि चमोली जनपद में फूलों की घाटी से सटे नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के पैंखंडा जंगल में पिछले छह दिनों से भीषण आग लगी हुई है, जो तमाम प्रयासों के बावजूद अभी तक पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी है। इस आग से फूलों की घाटी, जहां लगभग 600 दुर्लभ पुष्प प्रजातियां पाई जाती हैं, गंभीर खतरे में है।

श्री धस्माना ने कहा कि इस वर्ष प्रदेश में अब तक न तो पर्याप्त वर्षा हुई है और न ही बर्फबारी, जिससे प्रदेश में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। इसी कारण जो वनाग्नि की घटनाएं आमतौर पर फरवरी के अंत या मार्च में शुरू होती थीं, वे इस वर्ष जनवरी की शुरुआत में ही सामने आ रही हैं। यह संकेत है कि आने वाले गर्मी के मौसम में वनाग्नि की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वन विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग को नींद से जागकर अभी से आपातकालीन आपदा प्रबंधन की अग्रिम तैयारी शुरू करनी चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित कर भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टरों की मदद आग बुझाने के लिए मांगी जानी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा कि पिछले वर्षों में वन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर नष्ट हो गया। इस दौरान बड़े स्तर पर वन्यजीवों की हानि हुई, मानव क्षति भी हुई और यहां तक कि कई वन कर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि अब ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि संभावित खतरे को गंभीरता से लेते हुए समय रहते ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि प्रदेश के जंगल, जैव विविधता और मानव जीवन की रक्षा की जा सके।
