Uttrakhand

गैरसैण के लिए आर-पार की लड़ाई! 20 किमी पदयात्रा के बाद बड़ा ऐलान, अब देहरादून से गैरसैण तक महा मार्च और आमरण अनशन की चेतावनी

गैरसैण के लिए आर-पार की लड़ाई! 20 किमी पदयात्रा के बाद बड़ा ऐलान, अब देहरादून से गैरसैण तक महा मार्च और आमरण अनशन की चेतावनी

 

पूर्व IAS से लेकर युवाओं तक की हुंकार, बोले- “गैरसैण को स्थायी राजधानी बनाकर ही लेंगे दम”

देहरादून। भारत केसरी 
उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैण की मांग एक बार फिर सड़कों पर जोरदार तरीके से गूंज उठी है। ‘स्थायी राजधानी गैरसैण समिति’ के बैनर तले रविवार को देहरादून में 20 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली गई, जिसमें पूर्व नौकरशाहों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, युवाओं और विभिन्न संगठनों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

 

तेज बारिश के बीच निकली इस पदयात्रा में आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार पर उत्तराखंड आंदोलन की मूल भावना की अनदेखी करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी गैरसैण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिलना पहाड़ की जनता की भावनाओं के साथ अन्याय है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द गैरसैण को स्थायी राजधानी घोषित नहीं किया गया तो देहरादून से गैरसैण तक विशाल महा-पदयात्रा शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ी तो आमरण अनशन और बड़े जनआंदोलन से भी पीछे नहीं हटेंगे।

समिति के युवा मीडिया प्रभारी एवं पत्रकारिता छात्र पार्थ रतूड़ी ने भी सरकार और राजनीतिक दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नेताओं के स्वागत समारोहों के लिए समय है, लेकिन उत्तराखंड के शहीदों के सपनों और पहाड़ की जनता की भावनाओं के लिए नहीं। उन्होंने युवाओं और पहाड़ी समाज से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।

 

इस आंदोलन में प्रवासी उत्तराखंडियों की भागीदारी भी देखने को मिली। समिति के सदस्य अनिल बहुगुणा विशेष रूप से दिल्ली से देहरादून पहुंचे और पूरी पदयात्रा में शामिल रहे। पदयात्रा में पूर्व आईएएस एस.एस. पंक्ति, प्रकाश थपलियाल, आनंद राम, राकेश ध्यानी, सचिन थपलियाल, सुधीर गैरोला, आरती शर्मा, लक्ष्मी प्रसाद रतूड़ी, जगदीश ममगाईं और राजेंद्र प्रसाद कंडवाल सहित सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में गैरसैण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर आंदोलन और अधिक व्यापक और निर्णायक रूप ले सकता है।