नियो मेट्रो का सपना दिखाकर 90 करोड़ से ज्यादा खर्च, अब 24 मीटर ई-बस का मॉडल? AAP ने धामी सरकार से मांगा हिसाब
देहरादून। देहरादून की प्रस्तावित नियो मेट्रो परियोजना को लेकर आम आदमी पार्टी उत्तराखंड ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि वर्षों तक नियो मेट्रो के नाम पर DPR, कंसल्टेंसी, सर्वे और तकनीकी अध्ययन के लिए सरकारी धन खर्च किया गया, लेकिन अब सरकार नियो मेट्रो के बजाय 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस को सार्वजनिक परिवहन के विकल्प के रूप में आगे बढ़ा रही है।
आप ने सवाल किया कि यदि अंततः शहर की परिवहन जरूरतों को ई-बस या ई-BRTS के जरिए पूरा करना था, तो नियो मेट्रो की योजना पर वर्षों तक चली कवायद और उस पर खर्च हुए सार्वजनिक धन की जवाबदेही किसकी है।
DPR वापस होने के बाद बदला परियोजना का स्वरूप
पार्टी ने उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड मेट्रो रेल, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर एंड बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (UKMRC) लंबे समय से देहरादून में नियो मेट्रो परियोजना की DPR और विभिन्न तकनीकी गतिविधियों पर काम कर रहा था।
आप के मुताबिक, UKMRC की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 में देहरादून के ISBT-गांधी पार्क और FRI-रायपुर कॉरिडोर वाली Metro Neo DPR का उल्लेख है। पार्टी का कहना है कि केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 8 मई 2025 को इस DPR को वापस कर दिया था और देहरादून की परिवहन जरूरतों के लिए ई-बस तथा BRTS जैसे अपेक्षाकृत कम लागत वाले विकल्पों पर विचार करने की बात सामने आई थी।
पार्टी ने यह भी दावा किया कि जनवरी 2026 में UKMRC बोर्ड ने Metro Neo के स्थान पर e-BUS/e-BRTS प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया।
‘90 करोड़ से अधिक खर्च का हिसाब दे सरकार’
आम आदमी पार्टी ने सरकार से मांग की कि नियो मेट्रो परियोजना से जुड़े अब तक के कुल खर्च का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए। पार्टी ने पूछा कि DPR तैयार करने, कंसल्टेंसी, ट्रैफिक स्टडी, सर्वे और अन्य तकनीकी कार्यों पर कितनी राशि खर्च हुई तथा किन एजेंसियों और कंसल्टेंसी फर्मों को कितना भुगतान किया गया।
आप के अनुसार, वर्ष 2023 से देहरादून के प्रस्तावित विभिन्न कॉरिडोर को लेकर ट्रैफिक-ट्रांसपोर्टेशन स्टडी, टोपोग्राफिकल सर्वे और जियो-टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन सहित कई प्रक्रियाओं के लिए UKMRC की ओर से निविदाएं भी जारी की गई थीं।
‘पहले नियो मेट्रो, अब 24 मीटर बस—पैसा कहां गया?’
आप ने कहा कि अब 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बस को देहरादून के सार्वजनिक परिवहन के नए समाधान के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है। पार्टी ने सवाल किया कि जब शहर में पहले से ही इलेक्ट्रिक बस सेवा संचालित की जा रही है और इसके संचालन को लेकर समय-समय पर वित्तीय चुनौतियों की बात सामने आती रही है, तो 24 मीटर लंबी बसों के संचालन और आर्थिक व्यवहार्यता को लेकर सरकार की ठोस योजना क्या है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि पहले भी बजट संबंधी दिक्कतों के चलते इलेक्ट्रिक बस संचालन प्रभावित होने की स्थिति बनी है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रस्तावित नई व्यवस्था के लिए वित्तीय संसाधन, संचालन मॉडल और जिम्मेदारी की संरचना क्या होगी।
‘परियोजना बदली है तो जवाबदेही भी तय हो’
आम आदमी पार्टी ने कहा कि ई-बस या सार्वजनिक परिवहन के किसी वैकल्पिक मॉडल पर विचार करना अपने आप में मुद्दा नहीं है। पार्टी का कहना है कि सवाल उस सार्वजनिक धन और वर्षों तक चली प्रक्रिया की जवाबदेही का है, जो नियो मेट्रो परियोजना के लिए खर्च की गई।
आप ने राज्य सरकार से नियो मेट्रो से जुड़े कुल खर्च, DPR और कंसल्टेंसी भुगतान, सर्वे एवं तकनीकी अध्ययनों पर हुए व्यय और भविष्य की 24 मीटर ई-बस योजना की वित्तीय रूपरेखा सार्वजनिक करने की मांग की है।
