Uttrakhand

ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ देहरादून में जन-जागरूकता संवाद, नागरिकों को बताए कानूनी अधिकार और शिकायत के तरीके

देहरादून, 24 सितंबर 2026।

देहरादून में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर नागरिकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर में जन-संवाद आयोजित किया गया। “ध्वनि प्रदूषण: नियम जानें, अपने अधिकार जानें, समाधान का हिस्सा बनें” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से करीब 100 नागरिकों ने हिस्सा लिया।

 

कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइज़ पॉल्यूशन ने दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर के सहयोग से किया। संवाद में अत्यधिक और लगातार होने वाले शोर से दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव, कानूनी प्रावधान, नागरिकों के अधिकार और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम का संचालन द अननोन इंडिया की प्रबंध संपादक एवं उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइज़ पॉल्यूशन की सह-संस्थापक कीर्ति अहलावत ने किया। वहीं सह-संस्थापक नितिन अहलावत ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण केवल प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि नागरिकों को भी नियमों की जानकारी लेकर जिम्मेदार तरीके से संस्थागत व्यवस्थाओं का इस्तेमाल करना चाहिए।

 

सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने समूह की गतिविधियों और अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव, नगर आयुक्त, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को करीब 30 अभ्यावेदन दिए जा चुके हैं।

 

कानूनी प्रावधानों और शिकायत प्रक्रिया की दी जानकारी

 

अधिवक्ता प्रणव पुरी ने ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत निर्धारित ध्वनि सीमाओं और लाउडस्पीकर एवं ध्वनि-विस्तारक उपकरणों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों की जानकारी दी। उन्होंने अत्यधिक शोर की स्थिति में 112 आपातकालीन सेवा से संपर्क करने और शिकायत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की प्रक्रिया भी समझाई।

 

नागरिकों को सलाह दी गई कि वे ध्वनि प्रदूषण की स्थिति में तारीख, समय, स्थान, अवधि और शोर के स्रोत का रिकॉर्ड रखें। समय अंकित फोटो-वीडियो, उपलब्ध डेसीबल माप और शिकायतों का लिखित रिकॉर्ड आगे की कार्रवाई में उपयोगी हो सकता है।

 

स्थानीय लोगों ने साझा किए अपने अनुभव

 

संवाद के दौरान कई नागरिकों ने तेज संगीत, डीजे, लाउडस्पीकर और आतिशबाजी से होने वाली परेशानियों को साझा किया। मेजर जनरल अतुल रावत, एवीएसएम (सेवानिवृत्त) ने लगातार शोर से आवासीय जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव की बात रखी।

 

वहीं विनेश रावत ने तेज संगीत और आतिशबाजी से बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई। करुणा थपलियाल ने कुठाल गेट क्षेत्र में लगातार शोर के कारण घर छोड़ने का अपना अनुभव साझा किया।

 

तपकेश्वर मंदिर के आसपास रहने वाले लोगों ने भी तेज संगीत और लाउडस्पीकर से होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया। प्रतिभागियों ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण केवल व्यक्तिगत परेशानी नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण वातावरण में रहने के अधिकार से भी जुड़ा विषय है।

 

स्कूल-कॉलेजों में भी चलेगा जागरूकता अभियान

 

आयोजकों के अनुसार अभियान के अगले चरण में स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही मोहल्ला स्तर पर नागरिकों को स्वयंसेवक के रूप में जोड़कर ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं को सामूहिक रूप से संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

कार्यक्रम के अंत में खुले प्रश्नोत्तर सत्र में नागरिकों ने ध्वनि सीमा, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल, शिकायत प्रक्रिया और पुलिस एवं प्रशासन की भूमिका से जुड़े सवाल पूछे।

 

कार्यक्रम में विजेंद्र रावत, डॉ. वी.के. डोभाल, जगदंबा प्रसाद मैठाणी, चंद्रशेखर तिवारी, डी.के. पांडे, डॉ. अरुण कुकसाल, अजय शर्मा, सुंदर सिंह बिष्ट, हिमांशु आहूजा, जगदीश बबला, आलोक सरीन और हरि ओम पाली समेत पुस्तकालय टीम, शोधकर्ताओं और देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिक मौजूद रहे।