‘सेवा संकल्प’ के नाम पर स्कूलों के राजनीतिकरण पर रोक की मांग, धस्माना ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र
देहरादून, 26 सितंबर 2026। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने ‘सेवा संकल्प’ कार्यक्रम को लेकर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अभियान के नाम पर राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में राजनीतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा विद्यालयों के राजनीतिकरण के प्रयास किए जा रहे हैं।

धस्माना ने अपने पत्र में कहा कि विद्यालय शिक्षा और बच्चों के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं। उनका आरोप है कि इन संस्थानों का उपयोग किसी राजनीतिक दल या विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
भाजपा नेताओं को मुख्य अतिथि बनाए जाने का लगाया आरोप
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि ‘सेवा संकल्प’ कार्यक्रम के तहत विद्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए विभागीय स्तर से निर्देश दिए जा रहे हैं।
धस्माना ने इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी, रायपुर, देहरादून के प्रधानाचार्यों को संबोधित 22 सितंबर 2026 के आदेश पत्र की प्रति मुख्य सचिव को संलग्न किए जाने की बात कही है।
गौरतलब है कि राज्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियां आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें 26 सितंबर को भाषण, 28 सितंबर को चित्रकला प्रतियोगिता, बालिका विद्यालयों में रंगोली तथा अन्य गतिविधियां शामिल हैं।
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मुख्य सचिव से सात बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग
धस्माना ने मुख्य सचिव से ‘सेवा संकल्प’ के तहत विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा है कि किसी भी विद्यालय परिसर, सरकारी भवन या सरकारी संसाधन का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल अथवा संगठन के प्रचार-प्रसार के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने विद्यालयों में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की किसी राजनीतिक कार्यक्रम में अनिवार्य अथवा दबावपूर्वक भागीदारी पर रोक लगाने की मांग भी की है।
सेवा संकल्प अभियान
इसके अलावा उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने, राजनीतिक प्रचार की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारियों एवं प्रबंधन की जवाबदेही तय करने तथा विद्यालयों में संवैधानिक मूल्यों, धर्मनिरपेक्षता, लोकतांत्रिक भावना और राजनीतिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट आचार-संहिता लागू करने की मांग की है।
धस्माना ने शासन से इस संबंध में की गई कार्रवाई और जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
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‘विद्यालय राजनीतिक प्रचार का माध्यम नहीं’
कांग्रेस नेता ने कहा कि शिक्षा संस्थान किसी राजनीतिक दल के प्रचार-प्रसार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र और समाज के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं। उन्होंने सरकार से विद्यालयों को राजनीतिक हस्तक्षेप से अलग रखते हुए विद्यार्थियों को स्वतंत्र और निष्पक्ष शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की।

