उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 का विमोचन, सीएम धामी ने GEP मॉडल को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर दिया जोर
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद और विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 का विमोचन किया। साथ ही ग्रॉस एनवायरनमेंट प्रोडक्ट (GEP) की वर्ष 2023-24 और वित्तीय वर्ष 2024-25 की तकनीकी रिपोर्ट भी जारी की गई। 

बैठक में GEP की तकनीकी रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 में कार्बन क्रेडिट को शामिल करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने आम लोगों के लिए वाटर हार्वेस्टिंग को सरल और सहज बनाने पर भी जोर दिया।
प्राकृतिक संसाधनों के आर्थिक मूल्यांकन पर जोर
GEP की तकनीकी रिपोर्ट के माध्यम से उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरणीय सेवाओं के आर्थिक मूल्यांकन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने वन, जल, जैव विविधता, मिट्टी संरक्षण, कार्बन अवशोषण सहित अन्य पर्यावरणीय सेवाओं के महत्व और उनके वैज्ञानिक एवं आर्थिक आकलन की संभावनाओं पर अपने विचार रखे।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि GEP के माध्यम से राज्य की प्राकृतिक और पर्यावरणीय संपदा के योगदान का वैज्ञानिक एवं आर्थिक मूल्यांकन किया जा सकता है। इससे पर्यावरणीय संसाधनों के महत्व को समझने के साथ ही विकास योजनाओं और नीतियों में उनके योगदान को प्रभावी ढंग से शामिल करने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड के लिए विकसित हो स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित GEP मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियां अन्य राज्यों से अलग हैं। ऐसे में राज्य के लिए GEP का ऐसा मॉडल विकसित किया जाना चाहिए, जो स्थानीय परिस्थितियों, संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप हो।

उन्होंने वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों से इस दिशा में आवश्यक तकनीकी सुझाव और सहयोग उपलब्ध कराने की अपेक्षा की।
कार्बन क्रेडिट और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों को देखते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में प्रभावी प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कार्बन अवशोषण, वन संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय सेवाओं से जुड़े प्रयासों को वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार देने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम रखते हुए विकास की नीतियों को आगे बढ़ाना होगा। विकास कार्यों की योजना बनाते समय प्राकृतिक संसाधनों की क्षमता, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आजीविका के अवसरों को जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए।
हिमालयी राज्य की चुनौतियों के अनुरूप नीति
उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 का उद्देश्य राज्य में क्षेत्र-विशिष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नए क्षेत्रों की पहचान करना और राज्य के समग्र विकास के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी हस्तक्षेपों को प्रोत्साहित करना है।
नीति में हिमालयी राज्य की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें हिमनद विज्ञान, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, जल संसाधन, कृषि, स्वास्थ्य, पर्वतीय क्षेत्रों की शैक्षिक चुनौतियां, प्रवास, कौशल विकास, उद्यमिता, बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा और नवाचार प्रमुख हैं।
नीति के तहत स्थानीय स्तर पर अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने और उनके परिणामों का प्रभावी प्रसार करने पर भी जोर दिया गया है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों ने रखे तकनीकी सुझाव
बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद सहित विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों ने GEP के वैज्ञानिक आधार, पर्यावरणीय आंकड़ों के संकलन एवं विश्लेषण तथा हिमालयी राज्य में इसके उपयोग की संभावनाओं पर अपने सुझाव रखे।
बैठक में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. शिव कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. परमिंदर मैन, HESCO के संस्थापक डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, IIT रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत, UCOST के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, शिक्षाविद् डॉ. रीमा पंत, यूकॉस्ट के सुरेंद्र सिंह मनराल और डॉ. विपिन सती सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे। 
