Uttrakhand

हरीश रावत से मुलाकात के दावे पर सवाल, यात्रा के बीच वेणुगोपाल के ट्वीट ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल

देहरादून।

उत्तराखंड कांग्रेस में चुनावी तैयारियों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ और कांग्रेस हाईकमान के बीच बढ़ती खींचतान अब सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नए विवाद में बदलती नजर आ रही है। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के एक एक्स पोस्ट में हरीश रावत से मुलाकात का दावा किया गया है, जबकि उसी दिन रावत कुमाऊं क्षेत्र में अपनी यात्रा पर थे। ऐसे में मुलाकात के समय और स्थान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

वेणुगोपाल ने अपने पोस्ट में कहा कि उन्होंने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मुलाकात कर चुनावी राज्य में चल रहे अभियान को लेकर चर्चा की। पोस्ट में यह भी कहा गया कि कांग्रेस का अभियान उत्तराखंड के सभी नेताओं को साथ लेकर, कांग्रेस के बैनर तले मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जाएगा।

वेणुगोपाल ने पार्टी नेताओं को अलग-अलग अभियान चलाने से बचने और संगठन की योजना के अनुरूप सामूहिक कार्यक्रम करने का संदेश भी दिया। कांग्रेस नेतृत्व ने प्रदेश इकाई की एकजुटता और मेहनत के दम पर चुनाव में सफलता का भरोसा जताया।

https://x.com/kcvenugopalmp/status/2107107663331160291

यात्रा पर थे रावत, फिर मुलाकात कब और कहां हुई?

विवाद की सबसे अहम कड़ी रावत की उसी दिन की यात्रा को लेकर है। सोमवार को उनकी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा जसपुर से शुरू होकर काशीपुर, रामनगर, कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी तक पहुंची।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस समय वेणुगोपाल की ओर से हरीश रावत से मुलाकात का दावा किया गया, उस समय रावत की लोकेशन क्या थी और दोनों नेताओं की मुलाकात आखिर कब और कहां हुई?

आलोचकों का तर्क है कि यदि रावत उस दौरान लगातार कुमाऊं में कार्यक्रमों में मौजूद थे, तो वेणुगोपाल के पोस्ट में उल्लेखित मुलाकात का समय और स्थान स्पष्ट होना चाहिए। यही वजह है कि अब सोशल मीडिया पोस्ट की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

‘एक और झूठ’ के आरोप से गरमाया सियासी माहौल

विपक्ष की ओर से इस घटनाक्रम पर कांग्रेस नेतृत्व को घेरा गया है। आरोप लगाने वालों ने इसे ‘एक और झूठ’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से सोशल मीडिया पर किया गया मुलाकात का दावा और रावत की उस समय की सार्वजनिक यात्रा के कार्यक्रम में विरोधाभास दिखाई देता है।

हालांकि, मुलाकात वास्तव में हुई या नहीं, इस पर अंतिम निष्कर्ष के लिए संबंधित नेताओं की ओर से स्पष्ट जानकारी जरूरी है। उपलब्ध विवरण में मुलाकात का सटीक समय और स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया है।

पहले से जारी है रावत और हाईकमान के बीच खींचतान

हरीश रावत की यात्रा को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की नाराजगी पहले ही सामने आ चुकी है। कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा ने रावत को पत्र लिखकर अलग कार्यक्रमों के बजाय पार्टी के सामूहिक अभियान पर जोर दिया था। इसके बाद रावत को केसी वेणुगोपाल के साथ चर्चा के लिए दिल्ली बुलाए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।

इसके बावजूद 5 अक्टूबर को रावत ने जसपुर से हल्द्वानी तक अपनी यात्रा जारी रखी। ऐसे में वेणुगोपाल का पोस्ट कांग्रेस के भीतर व्यक्तिगत राजनीतिक कार्यक्रमों बनाम संगठनात्मक रणनीति को लेकर चल रही बहस को और सामने ले आया है।

अब स्पष्टीकरण पर टिकी निगाहें

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वेणुगोपाल और रावत की मुलाकात कब, कहां और किन परिस्थितियों में हुई? यदि दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी तो उसका समय और स्थान स्पष्ट होने से उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकता है।

दूसरी ओर, विपक्ष इस घटनाक्रम को कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व के बीच समन्वय तथा दावों की विश्वसनीयता से जोड़कर देख रहा है। हालांकि, केसी वेणुगोपाल या हरीश रावत की ओर से इस मुलाकात को लेकर अलग से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

ऐसे में फिलहाल मामला दावे बनाम सार्वजनिक यात्रा कार्यक्रम के बीच उलझा हुआ है और पूरे घटनाक्रम की तस्वीर संबंधित नेताओं के स्पष्टीकरण के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगी।