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गुरु गोबिंद सिंह जी के आगमन पर्व पर रेसकोर्स गुरुद्वारे में सजे दीवान, संगतों को दी गई गुरुपर्व की बधाई

गुरु गोबिंद सिंह जी के आगमन पर्व पर रेसकोर्स गुरुद्वारे में सजे दीवान, संगतों को दी गई गुरुपर्व की बधाई

“ना किसी रानी के लिए, ना किसी राजपाट के लिए—गुरु गोबिंद सिंह जी ने सर्वस्व बलिदान किया देश और कौम के लिए” : सूर्यकांत धस्माना

देहरादून।

सिख पंथ के दसवें गुरु एवं खालसा पंथ के संस्थापक श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के आगमन पर्व के अवसर पर रेसकोर्स गुरुद्वारा, देहरादून में भव्य दीवान सजाया गया। इस अवसर पर संगतों को गुरुपर्व की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने गुरु गोबिंद सिंह जी के अतुलनीय बलिदान को स्मरण किया।

श्री धस्माना ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पिता, माता तथा चारों पुत्रों का बलिदान देश और कौम की रक्षा के लिए दिया, इसलिए उन्हें सर्वस्व बलिदानी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक इतिहास में ऐसा उदाहरण विरल है, जहां किसी गुरु या शासक ने देश और धर्म के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया हो।

देश और धर्म की रक्षा के लिए लड़ा गया युद्ध

सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि—

त्रेता युग में भगवान राम और रावण का युद्ध माता सीता के निमित्त हुआ,

द्वापर युग में महाभारत का युद्ध राजपाट और भूमि के विवाद को लेकर हुआ,

लेकिन कलियुग में गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब के विरुद्ध जो युद्ध किया, वह न किसी स्त्री के लिए था और न ही किसी राजसत्ता के लिए, बल्कि देश, धर्म और कौम की रक्षा के लिए था।

बलिदान की मिसाल बने गुरु गोबिंद सिंह जी

उन्होंने कहा कि जब गुरु गोबिंद सिंह जी को अपने चारों पुत्रों के शहीद होने का समाचार मिला, तब उनके चेहरे पर न शोक था और न ही पश्चाताप। उस समय उनके मुख से निकले अमर वचन—

“इन पुत्रन के शीश पर, वार दिए सुत चार,
चार मुए तो क्या हुआ, जीवत कई हजार।”

—देशप्रेम, धर्म और कौम की रक्षा के लिए सदैव अमर रहेंगे।

गुरुद्वारा सिंह सभा ने किया सम्मान

इस अवसर पर गुरुद्वारा सिंह सभा द्वारा सूर्यकांत धस्माना को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही—

महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी,

श्री रविंदर सिंह आनंद,

श्री राजेंद्र धवन

को भी स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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