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वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का हमला, धस्माना बोले- वैध वोट कटने नहीं देंगे

देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने रविवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची से जुड़े सवालों के सामने आने के बाद भाजपा नेता कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमलावर हो रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में धस्माना ने कहा कि एक प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्र की रिपोर्ट के बाद मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर देशभर में चर्चा हुई है। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाएं कांग्रेस के सवालों का जवाब देने के बजाय राहुल गांधी और कांग्रेस पर केंद्रित हैं।

 

 

धस्माना ने SIR को लेकर मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाल में चुनाव आयोग की बैठक से संबंधित प्रकाशित रिपोर्ट में आयोग के भीतर दर्ज असहमति के बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन घटनाक्रमों को मतदाता सूची की पारदर्शिता से जोड़कर देख रही है।

हालिया रिपोर्टों में भी चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन रिपोर्टों में आयोग द्वारा बाद में लिए गए फैसलों और स्पष्टीकरणों का भी जिक्र है।

‘हर वैध वोट के लिए लड़ेगी कांग्रेस’

धस्माना ने कहा कि कांग्रेस का रुख स्पष्ट है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी वैध मतदाताओं के अधिकारों को लेकर अभियान चलाएगी।

उत्तराखंड में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। चुनाव आयोग ने अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख 3 अक्टूबर 2026 निर्धारित की है, जबकि दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा 28 सितंबर तक है।

धस्माना ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश में SIR से जुड़े मामलों पर नजर रख रही है और वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बनाए रखने के लिए पार्टी स्तर पर रणनीति तैयार की जा रही है।

इस बीच, चुनाव आयोग की ओर से SIR प्रक्रिया को लेकर बताया गया है कि मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियों वाले मामलों में संबंधित मतदाताओं को नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है।