CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, देहरादून में पुलिस से झड़प
देहरादून, 27 सितंबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने रविवार को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आह्वान पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के 27 संगठनात्मक जिलों में प्रदर्शन कर प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजे। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला भी फूंका।


राजधानी देहरादून में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प की स्थिति बन गई। महानगर कांग्रेस के नेतृत्व में कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से मुख्य चुनाव आयुक्त की प्रतीकात्मक अर्थी लेकर निकले। पुलिस ने अर्थी को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक खींचतान हुई।
इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता अर्थी और पुतले को लेकर घंटाघर चौराहे पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया।
प्रदर्शन में महानगर कांग्रेस अध्यक्ष जसविंदर सिंह गोगी, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश महासचिव प्रतिमा सिंह, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल, सोशल मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष अभिनव थापर समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
Indian Express की रिपोर्ट का हवाला देकर कांग्रेस का हमला
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि The Indian Express की पत्रकार रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने और हटाने, Form-6 में बदलाव तथा चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर तक पहुंच जैसे मुद्दों पर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख है।
धस्माना ने इन रिपोर्टों को आधार बनाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
SIR को लेकर कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने Special Intensive Revision (SIR) के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल से हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार SIR के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।
हालांकि, कांग्रेस द्वारा लगाए गए “वोट चोरी” और चुनाव आयोग पर राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने के आरोप राजनीतिक दावे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में चुनाव आयोग ने इन आरोपों के संदर्भ में कहा है कि पिछले एक वर्ष में महत्वपूर्ण फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए और अलग-अलग टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं।
चुनाव आयोग ने कहा—अलग मत विचार-विमर्श का हिस्सा
The Indian Express को दिए जवाब में चुनाव आयोग ने कहा कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी संस्थान में विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, हाल के महीनों में SIR समेत विभिन्न चुनावी सुधारों और पहलों से जुड़े फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए।
इस बीच 27 सितंबर की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने हालिया बैठक के बाद नौ फैसलों की घोषणा की, जिनमें दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों को संबोधित किया गया, जबकि कुछ विषयों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।
कांग्रेस ने प्रदर्शन के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर वह आगे भी अपना विरोध जारी रखेगी।

